उन्होंने कहा कि अब हमें पता चल गया है कि ट्रम्प अपने भाषण ख़ुद ही लिखते हैं जिनमें प्रशंसा और धमकी दोनों चीज़ें होती हैं। ट्रम्प की भाषा वही होती है जो किसी मकान के मालिक की होती है जब वह किराएदार को किराए में देरी होने पर घर से बाहर निकाल देने की धमकी देता है। अंतर इतना ही है कि घर का मालिक आजकल वाइट हाउस में रह रहा है।
ट्रम्प ने उस पत्र में बड़ी घटिया भाषा का प्रयोग किया जो राष्ट्राध्यक्षों के बीच संवाद और पत्राचार में कभी भी प्रयोग नहीं की जाती उन्होंने लिखा कि "मूर्ख न बनो, मैं नहीं चाहता कि इतिहास तुम्हें शैतान के रूप में याद करे, मैं यह नहीं चाहता कि तुर्की की अर्थ व्यवस्था के विनाश का ज़िम्मेदार बनूं लेकिन मैं ऐसा करूंगा।" क्या इससे भी ज़्यादा गिरा जा सकता है?!
राष्ट्रपति अर्दोग़ान ने जिन्होंने इस अपमान को अच्छी तरह महसूस किया, कहा कि मैं ट्रम्प के इस पत्र को और उसमें किए गए अपमान को कभी नहीं भूलूंगा। अर्दोगान ने कहा कि मैं उचित समय पर इसका जवाब दूंगा क्योंकि इस समय मेरे लिए यह प्राथमिकता नहीं है।
यह नहीं मालूम के राष्ट्रपति अर्दोग़ान किस तरह जवाब देंगे और कब जवाब देंगे? इससे पहले अर्दोग़ान ने नाराज़ होकर कहा था कि अंकारा आने वाले अमरीकी उप राष्ट्रपति माइक पेन्स और विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो से मुलाक़ात नहीं करेंगे लेकिन फिर अर्दोग़ान ने उनसे मुलाक़ात की। हो सकता है कि अगले महीने जब अर्दोग़ान अमरीकी राष्ट्रपति की दावत पर वाशिंग्टन का दौरा करेंगे तो वह जवाब देने का उचित समय होगा। अर्दोग़ान इस यात्रा को रद्द कर सकते हैं या फिर यात्रा पर जाने के बाद ट्रम्प के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में जो वाइट हाउस में होगा ट्रम्प को मुंह तोड़ जवाब दे सकते हैं। या फिर हो सकता है कि ट्रम्प चुपके से माफ़ी मांग लें और कहें कि अब वह संस्कारों का ध्यान रखेंगे।
ग़ौर तलब यह है कि ट्रम्प बाज़ारू भाषा का प्रयोग करके बहुत ख़ुश होते हैं। वह फ़ार्स खाड़ी के अरब नेताओं के बारे में इसी प्रकार की भाषा का प्रयोग करके कह चुके हैं कि अगर अमरीका न होता तो इन नेताओं की सरकारें एक हफ़्ते के भीतर गिर जातीं और वह इकानामी क्लास के विमान पकड़ कर भागने पर मजबूर हो जाते।
मगर अब ट्रम्प की हिम्मत इतनी बढ़ गई कि उन्होंने तुर्क राष्ट्रपति अर्दोग़ान के बारे में भी वही रवैया अपनाया है तो यह बहुत बड़ा क़दम है और हमारा भी दिल चाहता है कि इस का मुंह तोड़ जवाब दिया जाए वह भी खुलेआम। मगर हर तमन्ना कहां पूरी होती है?!
शायद उत्तरी कोरिया के नेता किम जोंग ऊन इस मामले में माहिर हैं और उन्हें पता है कि किस तरह ट्रम्प से पेश आना चाहिए। किम जोंग ऊन ने ट्रम्प को बेवक़ूफ़ बनाया और कोई भी रियायत देने से साफ़ इंकार कर दिया। ट्रम्प को अपना वह अपमान बहुत अखरा था और ग़ुस्से में लौटकर आए थे लेकिन उसके बाद से वह उत्तरी कोरिया के नेता के लिए बड़े मीठे मीठे बोल बोलते हैं।
एक ज़माना वह भी था जब अरब व मुस्लिम नेताओं की अलग ही शान थी। सारे पश्चिमी नेता उनके साथ बड़े सम्मान से पेश आते थे। मुझे याद है कि जब ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मारग्रेट थैचर से मैंने 1981 में उनकी रियाज़ यात्रा से दो दिन पहले प्रधानमंत्री कार्यालय में मुलाक़ात की थी तो वह बहुत घबराई हुई थीं। हर छोटी बड़ी चीज़ के बारे में पूछ रही थीं ताकि मेज़बानों को उनकी कोई चीज़ बुरी न लग जाए। उन्होंने जब सऊदी नरेश शाह फ़हद से मुलाक़ात की थी तो हिजाब पहना था।
हमारा सारा दबदबा ख़त्म हो चुका है, हम अरब और मुसलमान आज मज़ाक़ बनकर रह गए हैं, हमें मूर्ख कहा जाता है, हमारे संसाधन लूटे जाते हैं वह भी उस व्यक्ति के हाथों जिसे कोई तमीज़ नहीं और संस्कारों का कोई ज्ञान नहीं है। अल्लाह ही हमारा मालिक है।